जो चिलचस्प और महत्वपूर्ण है। इसलिए उसकी तनिक विस्तार से चर्चा करनी होगी।
विवेकानन्द 21 जनवरी, 1890 को गाजीपुर पहुुंचे। वहां पवहारी बाबा नाम के एक प्रसिद्व साधु थे, जो गुफा में बन्द रहते थे। विवेकानन्द बाबा जी से मिलने के लिए बड़े उत्सुक थे, पर अवसर नहीं मिल रहा था। 31 जनवरी के पत्र में प्रभदादास मित्र को लिखते हैं, ‘‘बाबा जी से भेंट होना अत्यन्त कठिन है, वे मकान के बाहर नहीं निकलने, इच्छानुसार दरवाज़े पर आकर भीतर ही से बोलने हैं। अत्यन्त ऊंची दीवारों से घिरा हुआ,
जो चिलचस्प और महत्वपूर्ण है। इसलिए उसकी तनिक विस्तार से चर्चा करनी होगी।
विवेकानन्द 21 जनवरी, 1890 को गाजीपुर पहुुंचे। वहां पवहारी बाबा नाम के एक प्रसिद्व साधु थे, जो गुफा में बन्द रहते थे। विवेकानन्द बाबा जी से मिलने के लिए बड़े उत्सुक थे, पर अवसर नहीं मिल रहा था। 31 जनवरी के पत्र में प्रभदादास मित्र को लिखते हैं, ‘‘बाबा जी से भेंट होना अत्यन्त कठिन है, वे मकान के बाहर नहीं निकलने, इच्छानुसार दरवाज़े पर आकर भीतर ही से बोलने हैं। अत्यन्त ऊंची दीवारों से घिरा हुआ,