योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पत्र में न लिखूंगा। मिलने पर बताऊंगा। ऐसे महापुरूषों का साक्षात्कार किए बिना शास्त्रों पर पूर्ण विश्वास नहीं होता।’’

थ्वचित्र घटना क्या थी, यह प्रभदादास मित्र जानें-अगला पत्र यह है:

‘‘बड़ा हर्ष हुआ बाबा जी आचारी वैष्णव प्रतीत होते हैं। उन्हें योग, भक्ति एवं विनय की प्रतिमा कहना चाहिए। उनकी कुटी के चारों ओर दीवारें हैं। उनमें दरवाजे़ बहुत थोड़े हैं। परकोटा के भीतर एक बड़ी गुफा है, जहां वे समाधिस्थ पड़े रहते हैं। गुफा से


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पत्र में न लिखूंगा। मिलने पर बताऊंगा। ऐसे महापुरूषों का साक्षात्कार किए बिना शास्त्रों पर पूर्ण विश्वास नहीं होता।’’

थ्वचित्र घटना क्या थी, यह प्रभदादास मित्र जानें-अगला पत्र यह है:

‘‘बड़ा हर्ष हुआ बाबा जी आचारी वैष्णव प्रतीत होते हैं। उन्हें योग, भक्ति एवं विनय की प्रतिमा कहना चाहिए। उनकी कुटी के चारों ओर दीवारें हैं। उनमें दरवाजे़ बहुत थोड़े हैं। परकोटा के भीतर एक बड़ी गुफा है, जहां वे समाधिस्थ पड़े रहते हैं। गुफा से


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