से संक्रान्ति तक होम होता रहता है। अतएव यह निश्चय है कि वे इस अवधि में गुफा में प्रवेश करेंगे। मैं उनसे अनुमति किस प्रकार मांगू? वे तो कभी सीधी उत्तर ही नहीं देते। ‘यह दास’, ‘मेरा भाग्य’ इत्यादि कहते रहते हैं।
विवेकानन्द ने ‘पवहारी बाबा’ शीर्षक से एक लम्बा निबंध भी लिखा है जो विवेकानन्द साहित्य, नवम खंड में संकलित है। इस निबंध में उन्होंने पवहारी बाबा के डील-डौल और विचित्र मृत्यु का वर्णन इन शब्दों में किया है:
‘‘देखने
से संक्रान्ति तक होम होता रहता है। अतएव यह निश्चय है कि वे इस अवधि में गुफा में प्रवेश करेंगे। मैं उनसे अनुमति किस प्रकार मांगू? वे तो कभी सीधी उत्तर ही नहीं देते। ‘यह दास’, ‘मेरा भाग्य’ इत्यादि कहते रहते हैं।
विवेकानन्द ने ‘पवहारी बाबा’ शीर्षक से एक लम्बा निबंध भी लिखा है जो विवेकानन्द साहित्य, नवम खंड में संकलित है। इस निबंध में उन्होंने पवहारी बाबा के डील-डौल और विचित्र मृत्यु का वर्णन इन शब्दों में किया है:
‘‘देखने