बालक की मां का नाम भुवनेश्वरी देवी था। नरेन्द्र से पहले उनके दो लड़कियां थी। बेटे का मुंह देखने की उनके मन में बड़ी अभिलाषा थी, इसलिए सुबह-शाम शिव-मंदिर जाकर प्रार्थना करने लगी। कहते हैं कि एक दिन वह पुत्र-कामना में इतनी ध्यान मग्न हुई कि उन्हें कैलाशपति शिव सामने खड़े दिखाई दिए। धीरे-धीरे उन्होंने शिशु-रूप धारण किया और भुवनेश्वरी देवी की गोद में बैठ गए। इससे मां का यह विश्वास बना कि बेटे का जन्म शिव के वरदान से हुआ है,
बालक की मां का नाम भुवनेश्वरी देवी था। नरेन्द्र से पहले उनके दो लड़कियां थी। बेटे का मुंह देखने की उनके मन में बड़ी अभिलाषा थी, इसलिए सुबह-शाम शिव-मंदिर जाकर प्रार्थना करने लगी। कहते हैं कि एक दिन वह पुत्र-कामना में इतनी ध्यान मग्न हुई कि उन्हें कैलाशपति शिव सामने खड़े दिखाई दिए। धीरे-धीरे उन्होंने शिशु-रूप धारण किया और भुवनेश्वरी देवी की गोद में बैठ गए। इससे मां का यह विश्वास बना कि बेटे का जन्म शिव के वरदान से हुआ है,