इसलिए उन्होंने उसका नाम वीरेश्वर रखा। घर में यही नाम चलता था और प्रियजन ‘बिले’ कहकर पुकारते थे।
कलकत्ता में कायस्थ वंश के कई दत्त परिवार थे। इन परिवारों में बहुत से योग्य और विद्वान व्यक्ति पैदा हुए। विवेकानन्द के समकालीन इतिहासकार रमेशचंद्र दत्त उनमें से एक थे। विवेकानन्द का जन्म इसी कायस्थ परिवार में हुआ था। पर रोमां रोलां ने उन्हें क्षत्रीय वंश में उत्पन्न होना बताया है। शायद उन्हें यह भ्रान्ति इसलिए हुई कि खुद विवेकानन्द
इसलिए उन्होंने उसका नाम वीरेश्वर रखा। घर में यही नाम चलता था और प्रियजन ‘बिले’ कहकर पुकारते थे।
कलकत्ता में कायस्थ वंश के कई दत्त परिवार थे। इन परिवारों में बहुत से योग्य और विद्वान व्यक्ति पैदा हुए। विवेकानन्द के समकालीन इतिहासकार रमेशचंद्र दत्त उनमें से एक थे। विवेकानन्द का जन्म इसी कायस्थ परिवार में हुआ था। पर रोमां रोलां ने उन्हें क्षत्रीय वंश में उत्पन्न होना बताया है। शायद उन्हें यह भ्रान्ति इसलिए हुई कि खुद विवेकानन्द