तो इन चीजों को ले लेते थे। पर जब वे गुफा के भीतर चले जाते थे तब उन्हें इन चीजों की भी आवश्यकता नहीं रह जाती थी।....
‘‘हम पहले कह चुके हैं कि बाहर से धुआं दीख पड़ने ही से मालूम हो जाता था कि वे समाधि से उठे हैं। एक दिन उस जलते हुए धुएं में मांस की दुर्गंध आने लगी। आसपास के लोग इसके संबंध में अनुमान न कर सके कि क्या हो रहा है। अंत में जब वह दुर्गंध असह्म हो उठी और धुंआ भी अत्यधिक मात्रा में उठता हुआ दिखाई देने लगा, तब
तो इन चीजों को ले लेते थे। पर जब वे गुफा के भीतर चले जाते थे तब उन्हें इन चीजों की भी आवश्यकता नहीं रह जाती थी।....
‘‘हम पहले कह चुके हैं कि बाहर से धुआं दीख पड़ने ही से मालूम हो जाता था कि वे समाधि से उठे हैं। एक दिन उस जलते हुए धुएं में मांस की दुर्गंध आने लगी। आसपास के लोग इसके संबंध में अनुमान न कर सके कि क्या हो रहा है। अंत में जब वह दुर्गंध असह्म हो उठी और धुंआ भी अत्यधिक मात्रा में उठता हुआ दिखाई देने लगा, तब