हमारे देश ने जाने ऐसे कितने अद्भुत और विलक्षण व्यक्ति पैदा किए हैं उनसे सहमत-असहमत होना अलग रहा, पर उनके चरित्र की दृढ़ता और एकनिष्ठा से तो इन्कार नहीं किया जा सकता। ये ही वे लोेग हैं जिन्होंने ज्ञान के दीप को अपने खून से जलाया, मेंह-आंधी के भयंकर तूफानों में भी बुझने नहीं दिया और जनसाधारण में अपनी संस्कृति तथा परम्परा के प्रति दृढ़ एवं अटूट आस्था बनाए रखी।
इस अद्भुत पुरूष पवहारी बाबा से विवेकानन्द क्या चाहते थे और उनके आपसी संबंध क्या थे,
हमारे देश ने जाने ऐसे कितने अद्भुत और विलक्षण व्यक्ति पैदा किए हैं उनसे सहमत-असहमत होना अलग रहा, पर उनके चरित्र की दृढ़ता और एकनिष्ठा से तो इन्कार नहीं किया जा सकता। ये ही वे लोेग हैं जिन्होंने ज्ञान के दीप को अपने खून से जलाया, मेंह-आंधी के भयंकर तूफानों में भी बुझने नहीं दिया और जनसाधारण में अपनी संस्कृति तथा परम्परा के प्रति दृढ़ एवं अटूट आस्था बनाए रखी।
इस अद्भुत पुरूष पवहारी बाबा से विवेकानन्द क्या चाहते थे और उनके आपसी संबंध क्या थे,