इस बारे में सत्येन्द्रनाथ मजूमदार ‘विवेकानन्द चरित’ में लिखते हैः
‘‘घनिष्ठ परिचय हो जाने से महान तपस्वी पवहारी बाबा पर स्वामी जी बड़े मुग्ध हुए। उन्होंने अपने मन में सोचा, ‘क्या कारण है कि भगवान श्री रामकृष्ण की अहैतुकी कृपा के अधिकारी होकर भी आज तक मुझे शान्ति नहीं मिली? सम्भव है कि इन ब्रह्मज्ञ पुरूष की सहायता से मैं शान्ति प्राप्त कर सकूंगा।’’
‘‘स्वामी जी ने सुना था कि पवहारी बाबा ने योगमार्ग की साधना द्वारा सिद्वि
इस बारे में सत्येन्द्रनाथ मजूमदार ‘विवेकानन्द चरित’ में लिखते हैः
‘‘घनिष्ठ परिचय हो जाने से महान तपस्वी पवहारी बाबा पर स्वामी जी बड़े मुग्ध हुए। उन्होंने अपने मन में सोचा, ‘क्या कारण है कि भगवान श्री रामकृष्ण की अहैतुकी कृपा के अधिकारी होकर भी आज तक मुझे शान्ति नहीं मिली? सम्भव है कि इन ब्रह्मज्ञ पुरूष की सहायता से मैं शान्ति प्राप्त कर सकूंगा।’’
‘‘स्वामी जी ने सुना था कि पवहारी बाबा ने योगमार्ग की साधना द्वारा सिद्वि