योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

लाभ की थी। अतएव उनके हृदय में पवहारी बाबा से योग सीखने की इच्छा हुई। वे बाबा जी को पकड़कर बैठ गए और कहने लगे, ‘आपको मुझे योग की शिक्षा देनी ही होगी।’ अत्यन्त आग्रह देखकर पवहारी बाबा ने भी ‘हां’ कह दिया।’’

65 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘गम्भीर रात्रि में स्वामी जी पवहारी बाबा की गुफा में जाने के लिए तैयार हुए। श्री रामकृष्ण या पवहारी बाबा?-यह प्रश्न मन में आते ही उनका उत्साह ठंडा पड़ गया। विहृल हृदय से, संदेहपूर्ण चित्त


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लाभ की थी। अतएव उनके हृदय में पवहारी बाबा से योग सीखने की इच्छा हुई। वे बाबा जी को पकड़कर बैठ गए और कहने लगे, ‘आपको मुझे योग की शिक्षा देनी ही होगी।’ अत्यन्त आग्रह देखकर पवहारी बाबा ने भी ‘हां’ कह दिया।’’

65 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘गम्भीर रात्रि में स्वामी जी पवहारी बाबा की गुफा में जाने के लिए तैयार हुए। श्री रामकृष्ण या पवहारी बाबा?-यह प्रश्न मन में आते ही उनका उत्साह ठंडा पड़ गया। विहृल हृदय से, संदेहपूर्ण चित्त


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