योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘‘तेरी निर्विकल्प समाधि अभी ताले में बन्द करके रख दी गई है। काम समाप्त होने ही पर मिलेगी।’’

और फिर तू जीवों पर दया करने वाला कौन है? शिवज्ञान से जीवों की सेवा करो। गुरू के शब्दों की व्याख्या करते हुए नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द ही ने तो कहा था, ‘‘मैंने आज एक महान सत्य को पा लिया है। मैं इस जीवित सत्य की सारे संसार में घोषणा करूंगा।’’ नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द अपने ही इन शब्दों को कैसे झुठलाए ! वे ही अगर मन की शान्ति


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‘‘तेरी निर्विकल्प समाधि अभी ताले में बन्द करके रख दी गई है। काम समाप्त होने ही पर मिलेगी।’’

और फिर तू जीवों पर दया करने वाला कौन है? शिवज्ञान से जीवों की सेवा करो। गुरू के शब्दों की व्याख्या करते हुए नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द ही ने तो कहा था, ‘‘मैंने आज एक महान सत्य को पा लिया है। मैं इस जीवित सत्य की सारे संसार में घोषणा करूंगा।’’ नरेन्द्र अर्थात् विवेकानन्द अपने ही इन शब्दों को कैसे झुठलाए ! वे ही अगर मन की शान्ति


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