के लिए अपने को गुफा में बन्द कर ले और अन्त में पवहारी बाबा की तरह शरीर को होमानि की भेंट कर दे तो ‘‘वन के वेदान्त को घर में लाने और शिवरूपी जीवों की सेवा का कार्य कैसे सम्पन्न होगा?’’
निश्चित ही पवहारी बाबा का मार्ग विवेकानन्द का मार्ग नहीं था। गाजीपुर में रविवार को जो धर्म-सभा होती थी उसमें वे हमेशा देश, समाज तथा राष्ट्र ही को ऊंचा उठाने की बात कहा करते थे। व्यक्तिगत मुक्ति तथा शान्ति उनके जीवन का ध्येय नहीं था। उन्होंने
के लिए अपने को गुफा में बन्द कर ले और अन्त में पवहारी बाबा की तरह शरीर को होमानि की भेंट कर दे तो ‘‘वन के वेदान्त को घर में लाने और शिवरूपी जीवों की सेवा का कार्य कैसे सम्पन्न होगा?’’
निश्चित ही पवहारी बाबा का मार्ग विवेकानन्द का मार्ग नहीं था। गाजीपुर में रविवार को जो धर्म-सभा होती थी उसमें वे हमेशा देश, समाज तथा राष्ट्र ही को ऊंचा उठाने की बात कहा करते थे। व्यक्तिगत मुक्ति तथा शान्ति उनके जीवन का ध्येय नहीं था। उन्होंने