तो कई बार पवहारी बाबा से भी पूछा था कि ‘संसार की सहायता करने के लिए वे अपनी गुफा से क्यों बाहर नहीं आते?’ बाबा अगर बाहर नहीं आए तो विवेकानन्द स्वयं गुफा के भीतर कैसे चले जाते? वे गाजीपुर से जो आग अपने मन में लेकर लौटे उसे काशी में प्रभदादास के सम्मुख इन शब्दों में व्यक्त किया, ‘‘मैं इस समाज पर बम की तरह फट जाऊंगा और समाज मेरे पीछे चलेगा।’’
इस बार विवेकानन्द यह संकल्प ले चुके थे कि उन्हें हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक
तो कई बार पवहारी बाबा से भी पूछा था कि ‘संसार की सहायता करने के लिए वे अपनी गुफा से क्यों बाहर नहीं आते?’ बाबा अगर बाहर नहीं आए तो विवेकानन्द स्वयं गुफा के भीतर कैसे चले जाते? वे गाजीपुर से जो आग अपने मन में लेकर लौटे उसे काशी में प्रभदादास के सम्मुख इन शब्दों में व्यक्त किया, ‘‘मैं इस समाज पर बम की तरह फट जाऊंगा और समाज मेरे पीछे चलेगा।’’
इस बार विवेकानन्द यह संकल्प ले चुके थे कि उन्हें हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक