तक परस्पर सद्भाव का संदेश पहुंचाया-अविश्वासी आत्माओं को, अमूर्त में आसक्त बौद्विकों को उन्होंने प्रतिमाओं और देवमूर्तियांे का आदर सिखाया। युवकों को वेद, पुराण आदि प्राचीन गौरव ग्रन्थों का और इससे भी अधिक आज के जन समाज का अध्ययन करना सिखाया। और सभी को उन्होंने सिखाया, सम्पूर्ण श्रद्वा से भारतमाता के उद्वार के लिए आत्मोत्सर्ग करने का आनन्द।’’
‘‘उन्होंने जितना दिया उससे कम नहीं पाया। उनकी विराट आत्मा ज्ञान और अनुभव की
तक परस्पर सद्भाव का संदेश पहुंचाया-अविश्वासी आत्माओं को, अमूर्त में आसक्त बौद्विकों को उन्होंने प्रतिमाओं और देवमूर्तियांे का आदर सिखाया। युवकों को वेद, पुराण आदि प्राचीन गौरव ग्रन्थों का और इससे भी अधिक आज के जन समाज का अध्ययन करना सिखाया। और सभी को उन्होंने सिखाया, सम्पूर्ण श्रद्वा से भारतमाता के उद्वार के लिए आत्मोत्सर्ग करने का आनन्द।’’
‘‘उन्होंने जितना दिया उससे कम नहीं पाया। उनकी विराट आत्मा ज्ञान और अनुभव की