समदरसी है नाम तिहारो...’’
स्वामी जी इस समय पर इस पद के गाए जाने का भाव समझ गए। फिर भजन में आस्था का जो स्वर था, वह उन पर जीवन-भर के लिए छा गया। बाद में कई बरसों तक उसके स्मरण हो आने पर वे भाव-विभोर हो जाते थे। वे तुरन्त
69 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उठकर महफिल वाले कमरे में आए, सबके सामने नर्तकी बाला से क्षमा मांगी और फिर वहीं बैठकर उसका नृत्य देखा, गाना सुना।
हिमालय की लद्दाखी और तिब्बती जातियों में आज भी बहुपति-प्रथा
समदरसी है नाम तिहारो...’’
स्वामी जी इस समय पर इस पद के गाए जाने का भाव समझ गए। फिर भजन में आस्था का जो स्वर था, वह उन पर जीवन-भर के लिए छा गया। बाद में कई बरसों तक उसके स्मरण हो आने पर वे भाव-विभोर हो जाते थे। वे तुरन्त
69 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उठकर महफिल वाले कमरे में आए, सबके सामने नर्तकी बाला से क्षमा मांगी और फिर वहीं बैठकर उसका नृत्य देखा, गाना सुना।
हिमालय की लद्दाखी और तिब्बती जातियों में आज भी बहुपति-प्रथा