प्रचलित है। विवेकानन्द वहां यात्रा करते हुए पहली बार जिस परिवार में ठहरे, उसमें छः भाइयों की एक ही पत्नी थी। स्वामी जी ने अपने जोश में इन भाइयों को इस अनैतिकता का बोध कराना चाहा। परन्तु वे लोग उनकी बात सुनकर दंग रह गए। कहने लगे, ‘‘महाराज, एक स्त्री पर अकेला पुरूष अपना अधिकार जमा रखें, इससे बड़ी स्वार्थपरता और क्या होगी?’’
इस घटना से विवेकानन्द को सदाचार की सापेक्षता का बोध हुआ। उन्होंने जाना कि देश और काल के अनुसार नैतिक
प्रचलित है। विवेकानन्द वहां यात्रा करते हुए पहली बार जिस परिवार में ठहरे, उसमें छः भाइयों की एक ही पत्नी थी। स्वामी जी ने अपने जोश में इन भाइयों को इस अनैतिकता का बोध कराना चाहा। परन्तु वे लोग उनकी बात सुनकर दंग रह गए। कहने लगे, ‘‘महाराज, एक स्त्री पर अकेला पुरूष अपना अधिकार जमा रखें, इससे बड़ी स्वार्थपरता और क्या होगी?’’
इस घटना से विवेकानन्द को सदाचार की सापेक्षता का बोध हुआ। उन्होंने जाना कि देश और काल के अनुसार नैतिक