समझकर महसूस किया। रामकृष्ण को भावावेश में ज्योतिर्मय काली का साक्षात्कार हुआ और विवेकानन्द को इस यात्रा में जीर्णवसना भारतमाता का साक्षात्कार हुआ। एक बार वे कलकत्ता में किसी व्यक्ति के भूख से मर जाने की खबर पढ़कर फूट-फूटकर रोए और कातर स्वर में चिल्ला उठे, ‘‘मेरा देश, मेरा देश।’’
इससे पहले वे अपने गुरू-भाई, रामकृष्ण के गृहस्थ भक्त बलराम बसु के मरने की खबर सुनकर फूट-फूटकर रोए थे। तब प्रमदा बाबू ने कहा था, ‘‘यह क्या महाराज!
समझकर महसूस किया। रामकृष्ण को भावावेश में ज्योतिर्मय काली का साक्षात्कार हुआ और विवेकानन्द को इस यात्रा में जीर्णवसना भारतमाता का साक्षात्कार हुआ। एक बार वे कलकत्ता में किसी व्यक्ति के भूख से मर जाने की खबर पढ़कर फूट-फूटकर रोए और कातर स्वर में चिल्ला उठे, ‘‘मेरा देश, मेरा देश।’’
इससे पहले वे अपने गुरू-भाई, रामकृष्ण के गृहस्थ भक्त बलराम बसु के मरने की खबर सुनकर फूट-फूटकर रोए थे। तब प्रमदा बाबू ने कहा था, ‘‘यह क्या महाराज!