तो इन समाज-सुधारकों को जान लेना चाहिए कि मेरी जाति ने पुराने ज़माने में अन्य सेवाओं के अतिरिक्त, कई शताब्दियों तक आधे भारत का शासन किया था। यदि मेरी जाति छोड़ दी जाए, तो भारत की वर्तमान
14 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
सभ्यता का क्या शेष रहेगा? अकेले बंगाल ही में मेरी जाति में सबसे बड़े दार्शनिक, सबसे बड़े कवि, सबसे बड़े इतिहासज्ञ, सबसे बड़े पुरातत्वेत्ता और सबसे बड़े धर्म-प्रचारक उत्पन्न हुए हैं। मेरी ही जाति ने वर्तमान समय
तो इन समाज-सुधारकों को जान लेना चाहिए कि मेरी जाति ने पुराने ज़माने में अन्य सेवाओं के अतिरिक्त, कई शताब्दियों तक आधे भारत का शासन किया था। यदि मेरी जाति छोड़ दी जाए, तो भारत की वर्तमान
14 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
सभ्यता का क्या शेष रहेगा? अकेले बंगाल ही में मेरी जाति में सबसे बड़े दार्शनिक, सबसे बड़े कवि, सबसे बड़े इतिहासज्ञ, सबसे बड़े पुरातत्वेत्ता और सबसे बड़े धर्म-प्रचारक उत्पन्न हुए हैं। मेरी ही जाति ने वर्तमान समय