मंे वे नौजवान बड़े प्रभावित हुए और पूना स्टेशन पर गाड़ी रूकी तो तीसरा नौजवान स्वामी जी को अपने घर लिवा ले गया। वेदादि शास्त्रों पर उस नौजवान का अधिकार देखकर विवेकानन्द भी आनन्दित हुए और कई दिन तक उसके घर में रहकर वेद के गूढ़ अर्थों की चर्चा करते रहे। यह नौजवान की लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे, जो दरअसल उम्र में विवेकानन्द से सात बरस बड़े थे। भूपेन्द्रनाथ दत्त ने लिखा है कि पूना में बासुदेव ने उन्हें बताया कि विवेकानन्द और तिलक
मंे वे नौजवान बड़े प्रभावित हुए और पूना स्टेशन पर गाड़ी रूकी तो तीसरा नौजवान स्वामी जी को अपने घर लिवा ले गया। वेदादि शास्त्रों पर उस नौजवान का अधिकार देखकर विवेकानन्द भी आनन्दित हुए और कई दिन तक उसके घर में रहकर वेद के गूढ़ अर्थों की चर्चा करते रहे। यह नौजवान की लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे, जो दरअसल उम्र में विवेकानन्द से सात बरस बड़े थे। भूपेन्द्रनाथ दत्त ने लिखा है कि पूना में बासुदेव ने उन्हें बताया कि विवेकानन्द और तिलक