पंडित कितने ही प्रश्नों पर आपस में सहमत नहीं थे। विवेकानन्द ने मधुर कण्ठ से सुललित संस्कृत में बोलते हुए बताया कि वेदान्त के विभिन्न सम्प्रदाय परस्पर विरोधी होने के बजाए एक दूसरे के समर्थक हैं। वेदान्त शास्त्र कुछ दार्शनिक मतवादों की समष्टि नहीं, बल्कि साधक जीवन की विभिन्न स्थितियों में अनुभूत सत्यों का समूह है। उनके मुख से वेदान्त की यह नई व्याख्या सुनकर उपस्थित पंडित मंत्रमुग्ध तथा
71 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आश्चर्यचकित रह गए।
पंडित कितने ही प्रश्नों पर आपस में सहमत नहीं थे। विवेकानन्द ने मधुर कण्ठ से सुललित संस्कृत में बोलते हुए बताया कि वेदान्त के विभिन्न सम्प्रदाय परस्पर विरोधी होने के बजाए एक दूसरे के समर्थक हैं। वेदान्त शास्त्र कुछ दार्शनिक मतवादों की समष्टि नहीं, बल्कि साधक जीवन की विभिन्न स्थितियों में अनुभूत सत्यों का समूह है। उनके मुख से वेदान्त की यह नई व्याख्या सुनकर उपस्थित पंडित मंत्रमुग्ध तथा
71 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आश्चर्यचकित रह गए।