योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



इस सभा के बाद विवेकानन्द के अध्यापक पंडित शंकर पांडुरंग ने उनसे कहा, ‘‘स्वामी जी, मैं नहीं समझता कि इस देश में धर्म-प्रचार द्वारा आप कुछ कर पाएंगे।

समय और शक्ति व्यर्थ में मत गंवाइए। आप पाश्चात्य देशों में जाइए। वहां के लोग प्रतिभा और योग्यता का सम्मान करना जानते हैं। अपने उदार विचारों के कारण आप वहां अवश्य सफल होंगे।’’

स्वामी जी ने तनिक रूककर उत्तर दिया, ‘‘हा, एक दिन प्रभात में मैं समुद्र तट पर खड़ा तरंगों का नृत्य


326 of 1197



इस सभा के बाद विवेकानन्द के अध्यापक पंडित शंकर पांडुरंग ने उनसे कहा, ‘‘स्वामी जी, मैं नहीं समझता कि इस देश में धर्म-प्रचार द्वारा आप कुछ कर पाएंगे।

समय और शक्ति व्यर्थ में मत गंवाइए। आप पाश्चात्य देशों में जाइए। वहां के लोग प्रतिभा और योग्यता का सम्मान करना जानते हैं। अपने उदार विचारों के कारण आप वहां अवश्य सफल होंगे।’’

स्वामी जी ने तनिक रूककर उत्तर दिया, ‘‘हा, एक दिन प्रभात में मैं समुद्र तट पर खड़ा तरंगों का नृत्य


326 of 1197