झोंपड़ियां.... भारत की पवित्र भूमि का एक के बाद एक दृश्य सामने आता चला गया।
‘‘उन्होंने देखा-धर्म-क्षेत्र भारतवर्ष दुर्भिक्ष, महामारी, दुख-दैन्य, रोग-शोक से जर्जरित है। एक ओर प्रबल विलास-मोह में उन्मत्त अधिकार मद से मतवाले धनिक लोग गरीबों का खून चूसकर अपने विलास की पिपासा को तृप्त कर रहे हैं, दूसरी ओर अल्पाहार से जीर्ण-शीर्ण फटे वस्त्र वाले, मुखमंडल पर युगयुगान्तर की निराशा लिए अगणित नर-नारी, बालक-बालिकाएं ‘हा अन्न, हा
झोंपड़ियां.... भारत की पवित्र भूमि का एक के बाद एक दृश्य सामने आता चला गया।
‘‘उन्होंने देखा-धर्म-क्षेत्र भारतवर्ष दुर्भिक्ष, महामारी, दुख-दैन्य, रोग-शोक से जर्जरित है। एक ओर प्रबल विलास-मोह में उन्मत्त अधिकार मद से मतवाले धनिक लोग गरीबों का खून चूसकर अपने विलास की पिपासा को तृप्त कर रहे हैं, दूसरी ओर अल्पाहार से जीर्ण-शीर्ण फटे वस्त्र वाले, मुखमंडल पर युगयुगान्तर की निराशा लिए अगणित नर-नारी, बालक-बालिकाएं ‘हा अन्न, हा