योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

अन्न’ के चीत्कार से गगनमंडल को विदीर्ण कर रहे हैं। शिक्षा-दीक्षा के अभाव में निम्न जातीय लोग पुरोहित सम्प्रदाय के हृदयहीन कठोर व्यवहार से सनातन धर्म के प्रति श्रद्वाहीन हो गए हैं। केवल यही नहीं, हज़ारों व्यक्ति हिन्दू धर्म ही को अपराधी ठहराकर दूसरे धर्म को ग्रहण करने के लिए तैयार हैं, करोड़ों व्यक्ति अज्ञान के अंधकार में डूब रहे हैं-उनके हृदय में न आशा है, न विश्वास है और न नैतिक बल ही। शिक्षित नामधारी एक अपूर्व श्रेणी


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अन्न’ के चीत्कार से गगनमंडल को विदीर्ण कर रहे हैं। शिक्षा-दीक्षा के अभाव में निम्न जातीय लोग पुरोहित सम्प्रदाय के हृदयहीन कठोर व्यवहार से सनातन धर्म के प्रति श्रद्वाहीन हो गए हैं। केवल यही नहीं, हज़ारों व्यक्ति हिन्दू धर्म ही को अपराधी ठहराकर दूसरे धर्म को ग्रहण करने के लिए तैयार हैं, करोड़ों व्यक्ति अज्ञान के अंधकार में डूब रहे हैं-उनके हृदय में न आशा है, न विश्वास है और न नैतिक बल ही। शिक्षित नामधारी एक अपूर्व श्रेणी


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