पर धर्म का अभाव है। मैं वहां जाकर उन्हें वेदान्त की शिक्षा दूंगा और उसके बदले में उनसे कहूंगा-भारत की अपढ़, दरिद्र जतना के लिए धन दो, धन दो! और धन मिल जाएगा।
यों आगे का कार्य निर्धारित हुआ और वे शिकागो की धर्म-महासभा में जाने का निश्चय करके ही तैरकर समुद्र पट पर आए। अब कन्याकुमारी से फ्रांस अधिकृत पांडिचेरी होते हुए वे मद्रास पहुंचे। मद्रास में उनके कितने ही शिष्य थे। उनसे अपना
73 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
निश्चय बताया और अमेरिका जाने की तैयारी करने लगे।
पर धर्म का अभाव है। मैं वहां जाकर उन्हें वेदान्त की शिक्षा दूंगा और उसके बदले में उनसे कहूंगा-भारत की अपढ़, दरिद्र जतना के लिए धन दो, धन दो! और धन मिल जाएगा।
यों आगे का कार्य निर्धारित हुआ और वे शिकागो की धर्म-महासभा में जाने का निश्चय करके ही तैरकर समुद्र पट पर आए। अब कन्याकुमारी से फ्रांस अधिकृत पांडिचेरी होते हुए वे मद्रास पहुंचे। मद्रास में उनके कितने ही शिष्य थे। उनसे अपना
73 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
निश्चय बताया और अमेरिका जाने की तैयारी करने लगे।