योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



राजे और महाजन उन्हें विदेशी यात्रा के लिए सहायता देना चाहते थे, पर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा, ‘‘मैं देश की जनता, निर्धन जनता का प्रतिनिधि बनकर जा रहा हूं, इसलिए मध्यवित्त जनता ही से सहायता लेना उचित होगा।’’

इसकी सूचना उन्होंने अपने वराहनगर मठ के गुरू-भाइयों को नहीं दी। पर इत्िाफाक से जाने से एक दिन पहले बम्बई के निकट एक स्टेशन पर उनकी भें अभयनन्द और सूर्यनन्द से हो गई।

‘‘मैं समस्त भारत की प्रदक्षिणा कर चुका हॅं-मेरे बंधु,


337 of 1197



राजे और महाजन उन्हें विदेशी यात्रा के लिए सहायता देना चाहते थे, पर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा, ‘‘मैं देश की जनता, निर्धन जनता का प्रतिनिधि बनकर जा रहा हूं, इसलिए मध्यवित्त जनता ही से सहायता लेना उचित होगा।’’

इसकी सूचना उन्होंने अपने वराहनगर मठ के गुरू-भाइयों को नहीं दी। पर इत्िाफाक से जाने से एक दिन पहले बम्बई के निकट एक स्टेशन पर उनकी भें अभयनन्द और सूर्यनन्द से हो गई।

‘‘मैं समस्त भारत की प्रदक्षिणा कर चुका हॅं-मेरे बंधु,


337 of 1197