इससे उसका कुुछ परिशोध हो जाएगा। यदि मैं पैरिया (नीच चाण्डाल) होता, तो मुझे और भी आनन्द आता, क्योंकि मैं उन महापुरूष का शिष्य हूं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण होते हुए भी एक पैरिया (चाण्डाल) के घर को साफ करने की अपनी इच्छा प्रकट की थी....’’(विवेकानन्द साहित्य, पंचम खंड, पृष्ठ 106)
नरेन्द्र को विचारकों तथा वैज्ञानिकों की समृद्व परम्परा विरासत में मिली थी। उसके परदादा राममोहन दत्त कलकत्ता सुप्रीमकोर्ट के नामी वकील थे। जहां धन-ऐश्वर्य और ख्याति प्राप्त थी,
इससे उसका कुुछ परिशोध हो जाएगा। यदि मैं पैरिया (नीच चाण्डाल) होता, तो मुझे और भी आनन्द आता, क्योंकि मैं उन महापुरूष का शिष्य हूं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण होते हुए भी एक पैरिया (चाण्डाल) के घर को साफ करने की अपनी इच्छा प्रकट की थी....’’(विवेकानन्द साहित्य, पंचम खंड, पृष्ठ 106)
नरेन्द्र को विचारकों तथा वैज्ञानिकों की समृद्व परम्परा विरासत में मिली थी। उसके परदादा राममोहन दत्त कलकत्ता सुप्रीमकोर्ट के नामी वकील थे। जहां धन-ऐश्वर्य और ख्याति प्राप्त थी,