योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



के लिए दी गई है। हमारे चारों ओर, नदी के दोनों किनारों पर यह नगर बसा हुआ है-एक विशाल जनसमूह, जिसमें निरन्तर कोलाहल, धक्कम-धक्का, चहल-पहल और परस्पर स्पर्धा ही का बोलबाला दिखाई पड़ता है...‘लेकिन’ चीनी महिलाएं बाहर दिखाई नहीं देती। उनमें उत्तर भारत ही के समान परदे कह प्रथा है। केवल मज़दूर वर्ग ही की औरतें बाहर दिखाई पड़ती हैं। उनमें भी एकाध स्त्री ऐसी दिखाई पड़ेंगी, जिनमें पांव बच्चों से भी छोटे हैं और वह लड़खड़ाती हुई चलती है।’’


349 of 1197



के लिए दी गई है। हमारे चारों ओर, नदी के दोनों किनारों पर यह नगर बसा हुआ है-एक विशाल जनसमूह, जिसमें निरन्तर कोलाहल, धक्कम-धक्का, चहल-पहल और परस्पर स्पर्धा ही का बोलबाला दिखाई पड़ता है...‘लेकिन’ चीनी महिलाएं बाहर दिखाई नहीं देती। उनमें उत्तर भारत ही के समान परदे कह प्रथा है। केवल मज़दूर वर्ग ही की औरतें बाहर दिखाई पड़ती हैं। उनमें भी एकाध स्त्री ऐसी दिखाई पड़ेंगी, जिनमें पांव बच्चों से भी छोटे हैं और वह लड़खड़ाती हुई चलती है।’’


349 of 1197