देश था। वह पाश्चात्य देशों से हर बात में होड़ ले रहा था । इससे ठीक बारह बरस बाद उसने ज़ारशाही रूस को युद्व में हराया। जापान की उभरती और पैर फेला रही शक्ति का विवेकानन्द ने यांे वर्णन किया हैः
‘‘जान पड़ता है, जापानी लोग वर्तमान आवश्यकताओं के प्रति पूर्ण सचेत हो गए हैं। उनकी एक पूर्ण सुव्यवस्थित सेना है, जिसमें यहीं के अफसर द्वारा आविष्कृत तोपें काम में लाई जाती हैं और जो अन्य देशों की तुलना में किसी से कम नहीं हैं। वे लोग
देश था। वह पाश्चात्य देशों से हर बात में होड़ ले रहा था । इससे ठीक बारह बरस बाद उसने ज़ारशाही रूस को युद्व में हराया। जापान की उभरती और पैर फेला रही शक्ति का विवेकानन्द ने यांे वर्णन किया हैः
‘‘जान पड़ता है, जापानी लोग वर्तमान आवश्यकताओं के प्रति पूर्ण सचेत हो गए हैं। उनकी एक पूर्ण सुव्यवस्थित सेना है, जिसमें यहीं के अफसर द्वारा आविष्कृत तोपें काम में लाई जाती हैं और जो अन्य देशों की तुलना में किसी से कम नहीं हैं। वे लोग