योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

हाव-भाव, रंग-ढंग सभी सुन्दर हैं। जापान सौंदर्य-भूमि है! प्रायः प्रत्येक घर के पिछवाड़े जापानी ढंग का बढ़िया बगीचा रहता है। इन बगीचों के छोटे-छोटे लता-वृक्ष, हरे-भरे घास के मैदान छोटे-छोटे जलाशय और नालियांे पर बने हुए छोटे-छोटे पत्थर के पुल बड़े सुहावने लगते हैं।’’

इधर जापान का यह वैभव और उधर जीर्ण-शीर्ण भारत और उसका आत्म-केन्द्रित स्वार्थांध शिक्षित वर्ग। कलम को हृदय के खून में डुबोकर लिखा: ‘‘जापानियों के विषय में जो कुछ मेरे मन में है,


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हाव-भाव, रंग-ढंग सभी सुन्दर हैं। जापान सौंदर्य-भूमि है! प्रायः प्रत्येक घर के पिछवाड़े जापानी ढंग का बढ़िया बगीचा रहता है। इन बगीचों के छोटे-छोटे लता-वृक्ष, हरे-भरे घास के मैदान छोटे-छोटे जलाशय और नालियांे पर बने हुए छोटे-छोटे पत्थर के पुल बड़े सुहावने लगते हैं।’’

इधर जापान का यह वैभव और उधर जीर्ण-शीर्ण भारत और उसका आत्म-केन्द्रित स्वार्थांध शिक्षित वर्ग। कलम को हृदय के खून में डुबोकर लिखा: ‘‘जापानियों के विषय में जो कुछ मेरे मन में है,


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