वह सब मैं इस छोटे से पत्र में लिखने में असमर्थ हूं। मेरी केवल यह इच्छा है कि प्रतिवर्ष यथेष्ट संख्या में हमारे
77 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
नवयुवकों को चीन और जापान मंे आना चाहिए। जापानी लोगों के लिए आज भारतवर्ष उच्च और श्रेष्ठ वस्तुओं को स्वप्न-राज् है। औ तुम लोग क्या कर रहे हो?... जीवन-भर केवल बेकार बातें किया करते हो, व्यर्थ बकवास करने वाले, तुम लोग क्या हो? आओ, इन लोगों को देखो और उसके बाद जाकर लज्जा से मुंह
वह सब मैं इस छोटे से पत्र में लिखने में असमर्थ हूं। मेरी केवल यह इच्छा है कि प्रतिवर्ष यथेष्ट संख्या में हमारे
77 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
नवयुवकों को चीन और जापान मंे आना चाहिए। जापानी लोगों के लिए आज भारतवर्ष उच्च और श्रेष्ठ वस्तुओं को स्वप्न-राज् है। औ तुम लोग क्या कर रहे हो?... जीवन-भर केवल बेकार बातें किया करते हो, व्यर्थ बकवास करने वाले, तुम लोग क्या हो? आओ, इन लोगों को देखो और उसके बाद जाकर लज्जा से मुंह