योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

से होता हुआ बैंकुवर बन्दरगाह पर जा लगा। यहां से वे कनाडा के बीच में से तीन दिन की रेल यात्रा के बाद शिकागो पहुंचे। अपने गेरूआ बस्त्रों के कारण वे राह चलते लोगों के लिए तमाशा बन गए। वे न सिर्फ उत्सुकता और कौतुहल मंे भरे देखते थे, बल्कि घेर लेते और सताते थे। बच्चे उनकी हंसी उड़ाते और शोर मचाते हुए पीछ-पीछे चलते थे। दूसरी मुसीबत यह कि बैंकुवर ही से धोखेबाज़ी और गिरहकटी शुरू हो गई थी। जैसे जिसका दांव चलता था वैसे उन्हें ठगने


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से होता हुआ बैंकुवर बन्दरगाह पर जा लगा। यहां से वे कनाडा के बीच में से तीन दिन की रेल यात्रा के बाद शिकागो पहुंचे। अपने गेरूआ बस्त्रों के कारण वे राह चलते लोगों के लिए तमाशा बन गए। वे न सिर्फ उत्सुकता और कौतुहल मंे भरे देखते थे, बल्कि घेर लेते और सताते थे। बच्चे उनकी हंसी उड़ाते और शोर मचाते हुए पीछ-पीछे चलते थे। दूसरी मुसीबत यह कि बैंकुवर ही से धोखेबाज़ी और गिरहकटी शुरू हो गई थी। जैसे जिसका दांव चलता था वैसे उन्हें ठगने


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