योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

का प्रयत्न करता था। कुलियों ही के मुंह भरना मुश्किल हो गया। होटल में ठहरे तो वहां भी यही परेशानी। लिखा है:

‘‘...मेरा औसत एक पौंड हर रोज़ खर्च होता। यहां एक चुरटही का खर्च हमारे यहां के आइ आने है। अमेरिका वाले इतने धनी हैं कि वे पानी की तरह रूपया बहाते हैं, और उन्होंने कानून बनाकर सब चीज़ों का दाम इतना अधिक रखा है कि दुनिया का और कोई राष्ट्र किसी तरह उस स्तर पर नहीं पहुुंच सकता। साधारण कुली भी हर रोज़ 9-10 रूपये कमाता और


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का प्रयत्न करता था। कुलियों ही के मुंह भरना मुश्किल हो गया। होटल में ठहरे तो वहां भी यही परेशानी। लिखा है:

‘‘...मेरा औसत एक पौंड हर रोज़ खर्च होता। यहां एक चुरटही का खर्च हमारे यहां के आइ आने है। अमेरिका वाले इतने धनी हैं कि वे पानी की तरह रूपया बहाते हैं, और उन्होंने कानून बनाकर सब चीज़ों का दाम इतना अधिक रखा है कि दुनिया का और कोई राष्ट्र किसी तरह उस स्तर पर नहीं पहुुंच सकता। साधारण कुली भी हर रोज़ 9-10 रूपये कमाता और


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