योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उसका एक और उदाहरण यह है कि चार बरस बाद जब वे सेवियर दम्पति के साथ इंग्लैंड से स्विटज़रलैंड गए तो जिनोवा में एक कला-प्रदर्शनी चल रही थी। उन्होंने इसे दिन-भर चाव से देखा। अंत में एक बेलून देखकर वे उसमें उड़ने के लिए मचल उठे। बेलून एक नया आविष्कार था और इसमें आकाश-भ्रमण जोखिम से खाली नहीं था। इसलिए श्रीमति सेवियर ने उसमें उड़ने पर आपत्िा की। लेकिन स्वामी जी कब मानने वाले थे। वे न सिर्फ खुद उड़े, बल्कि सेवियर दम्पति को भी साथ


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उसका एक और उदाहरण यह है कि चार बरस बाद जब वे सेवियर दम्पति के साथ इंग्लैंड से स्विटज़रलैंड गए तो जिनोवा में एक कला-प्रदर्शनी चल रही थी। उन्होंने इसे दिन-भर चाव से देखा। अंत में एक बेलून देखकर वे उसमें उड़ने के लिए मचल उठे। बेलून एक नया आविष्कार था और इसमें आकाश-भ्रमण जोखिम से खाली नहीं था। इसलिए श्रीमति सेवियर ने उसमें उड़ने पर आपत्िा की। लेकिन स्वामी जी कब मानने वाले थे। वे न सिर्फ खुद उड़े, बल्कि सेवियर दम्पति को भी साथ


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