योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

बैठाया। आकाश साफ-सुथरा था। ऊपर से सूरज डूबने का मनोहर दृश्य देखकर स्वामी जी बड़े प्रसन्न हुए। बेलून जब धरती हुई, जो दिलचस्प भी है और उससे कई बातों पर प्रकाश भी पड़ता है। यह घटना उन्होंने अपने पत्र में रोचक ढंग से बयान की हैः

‘‘अभी हाल में शिकागो में एक बड़ा तमाशा हुआ। कपूरथला के राजा यहां

79 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

पधारे थे, और शिकागो समाज के कुछ लोग उन्हें आसमान पर चढ़ा रहे थे। मेले में राजा के साथ मेरी मुलाकात हुई थी,


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बैठाया। आकाश साफ-सुथरा था। ऊपर से सूरज डूबने का मनोहर दृश्य देखकर स्वामी जी बड़े प्रसन्न हुए। बेलून जब धरती हुई, जो दिलचस्प भी है और उससे कई बातों पर प्रकाश भी पड़ता है। यह घटना उन्होंने अपने पत्र में रोचक ढंग से बयान की हैः

‘‘अभी हाल में शिकागो में एक बड़ा तमाशा हुआ। कपूरथला के राजा यहां

79 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

पधारे थे, और शिकागो समाज के कुछ लोग उन्हें आसमान पर चढ़ा रहे थे। मेले में राजा के साथ मेरी मुलाकात हुई थी,


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