योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पर वह तो अमीर आदमी ठहरे-मुझ फकीर के साथ बातचीत क्यों करते ! उधर एक सनकी-सा, धोती पहने हुए महाराष्ट्री ब्राह्यण मेले में कागज़ पर नाखून के सहारे बनी हुई तस्वीरें बेच रहा था। उसने अखबारों के संवाददाताओं से उस राजा के विरूद्व तरह-तरह की बातें कह दी थी। उसने कहा था कि यह आदमी बड़ी नीच जाति का है और यह राजा गुलाम के अलावा और कुछ नहीं है और ये बहुधा दुराचारी होते हैं, इत्यादि। और यहां के सत्यवादी (?) सम्पादकों ने, जिनके लिए अमेरिका


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पर वह तो अमीर आदमी ठहरे-मुझ फकीर के साथ बातचीत क्यों करते ! उधर एक सनकी-सा, धोती पहने हुए महाराष्ट्री ब्राह्यण मेले में कागज़ पर नाखून के सहारे बनी हुई तस्वीरें बेच रहा था। उसने अखबारों के संवाददाताओं से उस राजा के विरूद्व तरह-तरह की बातें कह दी थी। उसने कहा था कि यह आदमी बड़ी नीच जाति का है और यह राजा गुलाम के अलावा और कुछ नहीं है और ये बहुधा दुराचारी होते हैं, इत्यादि। और यहां के सत्यवादी (?) सम्पादकों ने, जिनके लिए अमेरिका


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