मशहूर है-इस आदमी की बातों को कुछ गुरूत्व देने के लिए अगले दिन के अखबारों में स्तम्भ रंग डाले, जिनमें उन्होंने भारत से आए अगले दिन के अखबारों में स्तम्भ के स्तम्भ रंग डालें, जिनमें उन्होंने भारत से आए एक ज्ञानी पुरूष का-उसका मतलब मुझसे था, वर्णन किया और मेरी प्रशंसा के पुल बांधकर मेरे मुंह से ऐसी कल्पित बातें निकलवा डाली कि जिनको मैंने स्वप्न मंे भी कभी नहीं सोचा था। उस महाराष्ट्रीय ब्रह्यण ने कपूरथला के राजा के संबंध में जो कुछ कहा था,
मशहूर है-इस आदमी की बातों को कुछ गुरूत्व देने के लिए अगले दिन के अखबारों में स्तम्भ रंग डाले, जिनमें उन्होंने भारत से आए अगले दिन के अखबारों में स्तम्भ के स्तम्भ रंग डालें, जिनमें उन्होंने भारत से आए एक ज्ञानी पुरूष का-उसका मतलब मुझसे था, वर्णन किया और मेरी प्रशंसा के पुल बांधकर मेरे मुंह से ऐसी कल्पित बातें निकलवा डाली कि जिनको मैंने स्वप्न मंे भी कभी नहीं सोचा था। उस महाराष्ट्रीय ब्रह्यण ने कपूरथला के राजा के संबंध में जो कुछ कहा था,