योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उन सबको उन्होंने मेरे ही मुख से निकला हुआ रख दिया। अखबारों ने ऐसी खासी मरम्मत की कि शिकागो समाज ने तुरन्त राजा को त्याग दिया। इससे यह भी प्रकट होता है कि इस देश में धन या खिताबों की चमक-दमक की अपेक्षा बुद्वि की कदर अधिक है।’’

उन्हें एक दिन पता चला कि धर्म-महासभा सितम्बर से पहले नहीं होगी, और यह भी पता चला कि सभा की नियमावली के अनुसार किसी सभा-सोसाइटी के परिचय-पत्र के बिना कोई भी व्यक्ति प्रतिनिधि नहीं बन सकता और प्रतिनिधि बनने के लिए जो समय निश्चित था,


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उन सबको उन्होंने मेरे ही मुख से निकला हुआ रख दिया। अखबारों ने ऐसी खासी मरम्मत की कि शिकागो समाज ने तुरन्त राजा को त्याग दिया। इससे यह भी प्रकट होता है कि इस देश में धन या खिताबों की चमक-दमक की अपेक्षा बुद्वि की कदर अधिक है।’’

उन्हें एक दिन पता चला कि धर्म-महासभा सितम्बर से पहले नहीं होगी, और यह भी पता चला कि सभा की नियमावली के अनुसार किसी सभा-सोसाइटी के परिचय-पत्र के बिना कोई भी व्यक्ति प्रतिनिधि नहीं बन सकता और प्रतिनिधि बनने के लिए जो समय निश्चित था,


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