योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वह अब बीत चुका है। मतलब यह कि स्वामी जी को हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में उसमें शामिल होना असम्भव दिखाई दिया।

उनके पास जो धन बचा था, उसमें से अधिकांश होटल के दो हफ्ते के खर्च में उठ गया। वहां की ठंड सहन करने लायक गर्म कपड़े भी उनके पास नहीं थे। वे हैरान और परेशान शिकागो से बोस्टन गए। कुछ भी हो, वे अमेरिका ही में रहकर वेदान्त का प्रचार करना चाहते थे। जब वे बोस्टन से लौट रहे थे, तो अचानक गाड़ी में एक धनी वृद्व महिला से उनका परिचय हो गया। उसे जब,


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वह अब बीत चुका है। मतलब यह कि स्वामी जी को हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में उसमें शामिल होना असम्भव दिखाई दिया।

उनके पास जो धन बचा था, उसमें से अधिकांश होटल के दो हफ्ते के खर्च में उठ गया। वहां की ठंड सहन करने लायक गर्म कपड़े भी उनके पास नहीं थे। वे हैरान और परेशान शिकागो से बोस्टन गए। कुछ भी हो, वे अमेरिका ही में रहकर वेदान्त का प्रचार करना चाहते थे। जब वे बोस्टन से लौट रहे थे, तो अचानक गाड़ी में एक धनी वृद्व महिला से उनका परिचय हो गया। उसे जब,


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