पूछने पर, मालूम हुआ कि विवेकानन्द-एक भारतीय संन्यासी अमेरिका में वेदान्त का प्रचार करने आए हैं, तो वह उन्हें अपने साथ एक करीब के गांव में ले गई और उन्हें वहां अपने घर पर आराम से रखा। लिखा है, ‘‘यहां पर रहने से मुझे यह सुविधा होती है कि मेरा हर रोज़ एक पौंड के हिसाब से जो खर्च हो रहा है, वह बच जाता है और उनको यह लाभ होता है कि वे अपने मित्रों को बुलाकर भारत से आया हुआ एक अजीब जानवर दिखा रही हैं।’’
जिन दो पत्रों से ये अंश लिऐ गए हैं,
पूछने पर, मालूम हुआ कि विवेकानन्द-एक भारतीय संन्यासी अमेरिका में वेदान्त का प्रचार करने आए हैं, तो वह उन्हें अपने साथ एक करीब के गांव में ले गई और उन्हें वहां अपने घर पर आराम से रखा। लिखा है, ‘‘यहां पर रहने से मुझे यह सुविधा होती है कि मेरा हर रोज़ एक पौंड के हिसाब से जो खर्च हो रहा है, वह बच जाता है और उनको यह लाभ होता है कि वे अपने मित्रों को बुलाकर भारत से आया हुआ एक अजीब जानवर दिखा रही हैं।’’
जिन दो पत्रों से ये अंश लिऐ गए हैं,