वे विवेकानन्द साहित्य के प्रथम खंड में संकलित हैं।
स्वामी जी को इस वृद्व महिला के घर पर रहने से और भी काफी लाभ पहुंचा।
80 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
वह उन्हें एक महिला-सभा में ले गई, जिसमें उनका पहला व्याख्यान हुआ। महिलाओं की सलाह मानकर उन्होंने पोशाक बदल दी। आम इस्तेमाल के लिए उन्होंने एक काला लम्बा कोट बनवाया। गेरूआ रंग की पगड़ी और चोगा व्याख्यानों के समय पहनने के लिए रख छोड़े। स्त्री-कारागार की सुपरिंटेंडेंट श्रीमती
वे विवेकानन्द साहित्य के प्रथम खंड में संकलित हैं।
स्वामी जी को इस वृद्व महिला के घर पर रहने से और भी काफी लाभ पहुंचा।
80 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
वह उन्हें एक महिला-सभा में ले गई, जिसमें उनका पहला व्याख्यान हुआ। महिलाओं की सलाह मानकर उन्होंने पोशाक बदल दी। आम इस्तेमाल के लिए उन्होंने एक काला लम्बा कोट बनवाया। गेरूआ रंग की पगड़ी और चोगा व्याख्यानों के समय पहनने के लिए रख छोड़े। स्त्री-कारागार की सुपरिंटेंडेंट श्रीमती