योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जानसन से परिचय हुआ। उनके साथ जाकर कारागार देखा, जिसे वे ‘सुधारशाला’ कहते थे, बंदियों को समाज के उपयोगी अंग बनाने के लिए वहां उनके साथ जो सुन्दर बर्ताव किया जाता है, स्वामी जी ने अपने पत्र में उसका विस्तृत वर्णन किया है। फिर इस वृद्व महिला के मकान पर उनका परिचय हार्वर्ड विश्वविद्यालय में यूनानी भाषा के प्रोफेसर जे.एस. राइट से हुआ। थोड़ी ही देर की बातचीत में प्रोफेसर महोदय स्वामी जी से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, ‘‘आप


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जानसन से परिचय हुआ। उनके साथ जाकर कारागार देखा, जिसे वे ‘सुधारशाला’ कहते थे, बंदियों को समाज के उपयोगी अंग बनाने के लिए वहां उनके साथ जो सुन्दर बर्ताव किया जाता है, स्वामी जी ने अपने पत्र में उसका विस्तृत वर्णन किया है। फिर इस वृद्व महिला के मकान पर उनका परिचय हार्वर्ड विश्वविद्यालय में यूनानी भाषा के प्रोफेसर जे.एस. राइट से हुआ। थोड़ी ही देर की बातचीत में प्रोफेसर महोदय स्वामी जी से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, ‘‘आप


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