योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जी को नीग्रो समझकर घृणा से मुंह मोड़ लिया। रात का समय, बर्फ गिरना शुरू हो गया था और ठहरने का कोई ठिकाना नहीं था। मालगोदाम के पास एक खाली पैकिंग बक्स मिल गया। उन्होंने उसी में घुसकर सारी रात बिताई। सवेरा होते ही सड़क पर निकल पड़े। भूख के मारे बुरा हाल था। भिक्षा में कुछ पा जाने के लिए दर-दर घूमने लगे। पर वह हिन्दुस्तान नहीं, अमेरिका था। जहां भी गए, वहीं उन्हें दुत्कारा गया। लोग उन्हें देखते ही घृणा से दरवाज़ा बंद कर लेते थे


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जी को नीग्रो समझकर घृणा से मुंह मोड़ लिया। रात का समय, बर्फ गिरना शुरू हो गया था और ठहरने का कोई ठिकाना नहीं था। मालगोदाम के पास एक खाली पैकिंग बक्स मिल गया। उन्होंने उसी में घुसकर सारी रात बिताई। सवेरा होते ही सड़क पर निकल पड़े। भूख के मारे बुरा हाल था। भिक्षा में कुछ पा जाने के लिए दर-दर घूमने लगे। पर वह हिन्दुस्तान नहीं, अमेरिका था। जहां भी गए, वहीं उन्हें दुत्कारा गया। लोग उन्हें देखते ही घृणा से दरवाज़ा बंद कर लेते थे


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