उन्होंने इस नये राष्ट्र के गुण-दोषों का सम्यक् विवेचन किया। 25 सितम्बर, 1894 को गुरू-भाइयों के नाम पत्र में वे लिखते हैं:
‘‘इस देश में ग्रीष्मकाल में सब समुद्र के किनारे चले जाते हैं, मैं भी गया था। यहां वालों को नाव खेने और ‘याट’ चलाने का रोग है। याट एक प्रकार का हल्का जहाज़ होता है और यह यहां के लड़के, बूढ़े तथा जिस किसी के पास धन है, उसी के पास है। उसी में पाल लगाकर वे लोग प्रतिदिन समुद्र में डाल देते हैं, और खाने-पीने
उन्होंने इस नये राष्ट्र के गुण-दोषों का सम्यक् विवेचन किया। 25 सितम्बर, 1894 को गुरू-भाइयों के नाम पत्र में वे लिखते हैं:
‘‘इस देश में ग्रीष्मकाल में सब समुद्र के किनारे चले जाते हैं, मैं भी गया था। यहां वालों को नाव खेने और ‘याट’ चलाने का रोग है। याट एक प्रकार का हल्का जहाज़ होता है और यह यहां के लड़के, बूढ़े तथा जिस किसी के पास धन है, उसी के पास है। उसी में पाल लगाकर वे लोग प्रतिदिन समुद्र में डाल देते हैं, और खाने-पीने