योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

और नाचने के लिए घर लौटते हैं और गाना-बजाना तो दिन-रात लगा ही रहता है, पियानों के मारे घर में टिकना मुश्किल हो जाता है।

हां, तुम जिन जी. डब्ल्यू. हेल के पते पर चिट्ठियां भेजते हो, उनकी भी कुछ बातें लिखता हूं। वे वृद्व हैं और उनकी वृद्वा पत्नी हैं दो कन्याएं हैं, दो भतीजियां और एक लड़का है। लड़का नौकरी करता है, इसलिए उसे दूसरी जगह रहना पड़ता है। लड़कियां घर पर रहती हैं, इस देश में लड़की का रिश्ता ही रिश्ता है। लड़के का विवाह होते ही वह और हो जाता है,


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और नाचने के लिए घर लौटते हैं और गाना-बजाना तो दिन-रात लगा ही रहता है, पियानों के मारे घर में टिकना मुश्किल हो जाता है।

हां, तुम जिन जी. डब्ल्यू. हेल के पते पर चिट्ठियां भेजते हो, उनकी भी कुछ बातें लिखता हूं। वे वृद्व हैं और उनकी वृद्वा पत्नी हैं दो कन्याएं हैं, दो भतीजियां और एक लड़का है। लड़का नौकरी करता है, इसलिए उसे दूसरी जगह रहना पड़ता है। लड़कियां घर पर रहती हैं, इस देश में लड़की का रिश्ता ही रिश्ता है। लड़के का विवाह होते ही वह और हो जाता है,


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