योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘इस देश की नारियों को देखकर मेरे तो होश उड़ गए हैं। मुझे बच्चे की तरह घर-बाहर, दुकान-बाज़ार में लिये फिरती हैं। सब काम करती हैं। मैं उसका चैथाई हिस्सा भी नहीं कर सकता। ये रूप में लक्ष्मी और गुण में सरस्वती हैं-ये साक्षात् जगदम्बा, इनकी पूजा करने से सर्वसिद्वि मिल सकती है। अरे, राम-राम भजो, हम भी भले आदमी हैं? इस तरह की मां जगदम्बा अगर अपने देश में एक हज़ार तैयार करके मर सकूं, तो निश्चित होकर मर सकूंगा। तभी तुम्हारे देश के आदमी आदमी कहलाने लायक नहीं हैं,


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‘‘इस देश की नारियों को देखकर मेरे तो होश उड़ गए हैं। मुझे बच्चे की तरह घर-बाहर, दुकान-बाज़ार में लिये फिरती हैं। सब काम करती हैं। मैं उसका चैथाई हिस्सा भी नहीं कर सकता। ये रूप में लक्ष्मी और गुण में सरस्वती हैं-ये साक्षात् जगदम्बा, इनकी पूजा करने से सर्वसिद्वि मिल सकती है। अरे, राम-राम भजो, हम भी भले आदमी हैं? इस तरह की मां जगदम्बा अगर अपने देश में एक हज़ार तैयार करके मर सकूं, तो निश्चित होकर मर सकूंगा। तभी तुम्हारे देश के आदमी आदमी कहलाने लायक नहीं हैं,


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