योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

तुम्हारे देश के पुरूष इस देश की नारियों की बात तो अलग रही।’’

एक ही देश के अलग-अलग शहरों का अलग-अलग विशिष्ट चरित्र होता है, विवेकानन्द की दृष्टि उसे भी समझने में नहीं चूकी। लिखा है, ‘‘मैं कुछ महीनों के लिए न्यूयार्क जा रहा हूं। वह शहर मानो सम्पूर्ण संयुक्त का मस्तक है, हाथ

83 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

तथा कोषागार स्वरूप है। यह अवश्य है कि बोस्टन को ‘ब्राह्यणों का शहर’ (विद्या चर्चा का प्रधान स्थान) कहा जाता है और यहां अमेरिका में हज़ारों व्यक्ति ऐसे हैं,


386 of 1197

तुम्हारे देश के पुरूष इस देश की नारियों की बात तो अलग रही।’’

एक ही देश के अलग-अलग शहरों का अलग-अलग विशिष्ट चरित्र होता है, विवेकानन्द की दृष्टि उसे भी समझने में नहीं चूकी। लिखा है, ‘‘मैं कुछ महीनों के लिए न्यूयार्क जा रहा हूं। वह शहर मानो सम्पूर्ण संयुक्त का मस्तक है, हाथ

83 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

तथा कोषागार स्वरूप है। यह अवश्य है कि बोस्टन को ‘ब्राह्यणों का शहर’ (विद्या चर्चा का प्रधान स्थान) कहा जाता है और यहां अमेरिका में हज़ारों व्यक्ति ऐसे हैं,


386 of 1197