को समझने में मदद मिलती है। और फिर इससे विज्ञान के विकास और खोल के विस्तार की प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिलेगी। अमेरिका में रहते हुए विवेकानन्द ने जो धर्म-प्रचार किया उसका इस भौतिक उन्नति से क्या ताल-मेल स्थापित किया और इस तालमेल पैदा करने में उनके चिंतन का क्षितिज कहां तक फैला? यह बात विशेष रूप से समझने की है और यह हमारे अगले परिच्छेद का विषय है।
विवेकानन्द अपने ही कथनानुसार दृश्य देखने वाले यात्री अथवा निरूद्देश्य
को समझने में मदद मिलती है। और फिर इससे विज्ञान के विकास और खोल के विस्तार की प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिलेगी। अमेरिका में रहते हुए विवेकानन्द ने जो धर्म-प्रचार किया उसका इस भौतिक उन्नति से क्या ताल-मेल स्थापित किया और इस तालमेल पैदा करने में उनके चिंतन का क्षितिज कहां तक फैला? यह बात विशेष रूप से समझने की है और यह हमारे अगले परिच्छेद का विषय है।
विवेकानन्द अपने ही कथनानुसार दृश्य देखने वाले यात्री अथवा निरूद्देश्य