इसी प्रकार अमेरिका की भौतिक उन्नति तथा समृद्वि की चकाचैंध के पीछे दमन और शोषण के जो भयंकर छिपे हुए थे, विवेकानन्द की पैनी दृष्टि ने उन्हें भी देखा। लिखा है, ‘‘पाश्चात्यवासी हमारे जाति भेद की चाहे जितनी बड़ी समालोचना करें, पर उनके बीच भी एक ऐसा जाति भेद है। अमेरिकावासियों के अनुसार सर्वशक्तिमान डालर यहां सब कुछ कर सकता है।’’1
1893 के आर्थिक संकट ने 1894 में और भी भयंकर रूप धारण कर लिया था अमेरिका के लिए यह बुरा साल था।
इसी प्रकार अमेरिका की भौतिक उन्नति तथा समृद्वि की चकाचैंध के पीछे दमन और शोषण के जो भयंकर छिपे हुए थे, विवेकानन्द की पैनी दृष्टि ने उन्हें भी देखा। लिखा है, ‘‘पाश्चात्यवासी हमारे जाति भेद की चाहे जितनी बड़ी समालोचना करें, पर उनके बीच भी एक ऐसा जाति भेद है। अमेरिकावासियों के अनुसार सर्वशक्तिमान डालर यहां सब कुछ कर सकता है।’’1
1893 के आर्थिक संकट ने 1894 में और भी भयंकर रूप धारण कर लिया था अमेरिका के लिए यह बुरा साल था।