योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

1894 में बेकारों की तादाद राष्ट्र के इतिहास में उस समय तक की किसी भी तादाद को पार कर चुकी थी। निर्धन तथा विपन्न लोग-गिरोह दर गिरोह रोटी और रोजी की तलाश में देश-भर मंे इधर-उधर घूम रहे थे। 2.

अगस्त में पुलमैन कम्पनी तथा रेलवे मज़दूरों की जब़र्दस्त हड़ताल हुई। हालांकि सुधारवादी टेªड यूनियन नेता ‘‘जो व्यक्ति सम्पत्िा को नुकसान पहुंचाएगा अथवा कानून तोड़ेगा, वह मज़दूरों का मित्र नहीं शत्रु है।’’, कहकर हड़ताली मज़दूरों को शान्त रखने का प्रयास कर रहे थे,


400 of 1197

1894 में बेकारों की तादाद राष्ट्र के इतिहास में उस समय तक की किसी भी तादाद को पार कर चुकी थी। निर्धन तथा विपन्न लोग-गिरोह दर गिरोह रोटी और रोजी की तलाश में देश-भर मंे इधर-उधर घूम रहे थे। 2.

अगस्त में पुलमैन कम्पनी तथा रेलवे मज़दूरों की जब़र्दस्त हड़ताल हुई। हालांकि सुधारवादी टेªड यूनियन नेता ‘‘जो व्यक्ति सम्पत्िा को नुकसान पहुंचाएगा अथवा कानून तोड़ेगा, वह मज़दूरों का मित्र नहीं शत्रु है।’’, कहकर हड़ताली मज़दूरों को शान्त रखने का प्रयास कर रहे थे,


400 of 1197