की गुलामी और भारत में उनके अत्याचारों के कारण मन में उनके प्रति घृणा तथा अवज्ञा का जो भाव था, वह यहां आकर बदल गया। वे दिसम्बर के शुरू में फिर अमेरिका चले गए और अपै्रल, 1896 के अंत में लौट आए। स्वदेश लौटकर कलकत्ता में भाषण देते हुए जहां उनके कुछ अंगे्रज़ शिष्य भी मौजुद थे, उन्हांेने कहा था:
‘‘ब्रिटिश भूमि पर अंग्रेज़ों के प्रति मुझसे अधिक घृणा का भाव लेकर कभी किसी ने पैर न रखा होगा, इस मंच पर जो अंगे्रज़ बन्धु हैं, वे ही
की गुलामी और भारत में उनके अत्याचारों के कारण मन में उनके प्रति घृणा तथा अवज्ञा का जो भाव था, वह यहां आकर बदल गया। वे दिसम्बर के शुरू में फिर अमेरिका चले गए और अपै्रल, 1896 के अंत में लौट आए। स्वदेश लौटकर कलकत्ता में भाषण देते हुए जहां उनके कुछ अंगे्रज़ शिष्य भी मौजुद थे, उन्हांेने कहा था:
‘‘ब्रिटिश भूमि पर अंग्रेज़ों के प्रति मुझसे अधिक घृणा का भाव लेकर कभी किसी ने पैर न रखा होगा, इस मंच पर जो अंगे्रज़ बन्धु हैं, वे ही