उसका साक्षी देंगे। परन्तु जितना ही मैं उन लोगों के साथ रहने लगा, जितना ही उनके साथ मिलने लगा, जितना ही ब्रिटिश जाति के जीवन-यंत्र की गति लक्ष्य करने लगा, उस जाति का हृदय स्पंदन किस जगह हो रहा है यह जितना ही समझने लगा, उतना ही उन्हें प्यार करने लगा।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 204)
6 जुलाई के पत्र में फ्रेंसिस लेगेट को लिखते हैं, ‘‘ब्रिटिश साम्राज्य के कितने ही दोष क्यों न हों, पर भाव-प्रसार का ऐसा उत्कृष्ट यंत्र अब तक कहीं नहीं
उसका साक्षी देंगे। परन्तु जितना ही मैं उन लोगों के साथ रहने लगा, जितना ही उनके साथ मिलने लगा, जितना ही ब्रिटिश जाति के जीवन-यंत्र की गति लक्ष्य करने लगा, उस जाति का हृदय स्पंदन किस जगह हो रहा है यह जितना ही समझने लगा, उतना ही उन्हें प्यार करने लगा।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 204)
6 जुलाई के पत्र में फ्रेंसिस लेगेट को लिखते हैं, ‘‘ब्रिटिश साम्राज्य के कितने ही दोष क्यों न हों, पर भाव-प्रसार का ऐसा उत्कृष्ट यंत्र अब तक कहीं नहीं